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टीकाकरण संकट विरासत में मिला, जब हमने सत्ता संभाली तब खसरे की कोई वैक्सीन स्टॉक में नहीं थी: बीएनपी सरकार

बांग्लादेश वर्तमान में खसरे (Measles) के गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जहां सैकड़ों बच्चों की मौत हो चुकी है और हजारों बच्चे संक्रमित हुए हैं। यह स्थिति प्रशासन की विफलता और पुरानी सरकारों की प्राथमिकताओं की कमी का नतीजा मानी जा रही है। बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की वर्तमान सरकार ने दावा किया है कि उन्हें जब सत्ता में आने का मौका मिला, तब वैक्सीन्स का भंडार बिल्कुल खाली था। इसीलिए उन्होंने पिछली व्यवस्थाओं को दोषी ठहराया है, क्योंकि पूर्व में टीकाकरण कार्यक्रमों को रोक दिया गया था, जिससे यह बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया।

खसरे जैसी संक्रामक बीमारी बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है और इसकी रोकथाम के लिए सामूहिक टीकाकरण बेहद आवश्यक होता है। बीएनपी सरकार के अनुसार, वे इस विरासत में मिली खसरे की वैक्सीन की कमी को तुरंत पूरा करने में लगी है। सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और वैक्सीनेशन के लिए विशेष अभियान शुरू करने की बात कही है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वे प्राथमिकता के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में टीका प्रबंधित कर रहे हैं ताकि बीमारी के प्रसार को रोक सकें।

वहीं, हाइकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में जांच शुरू कर दी है। कोर्ट अब उच्च अधिकारियों को देश छोड़ने से रोकने पर विचार कर रही है ताकि वैक्सीन्स की कमी के पीछे की जिम्मेदारियों का सही तरीके से पता लगाया जा सके। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि वैक्सीन संकट की जांच में सरकारी स्तर पर गड़बड़ियों की आशंका जताई जा रही है।

समाजिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण कार्यक्रमों की निरंतरता बेहद आवश्यक है। पूर्व सरकारों द्वारा इससे जुड़े अभियानों को रोकना न केवल आज के दौर में बच्चों की जान पर खेलना है बल्कि आने वाले वर्षों में भी सीमा रहित महामारी फैलाने का खतरा पैदा करना है। बीएनपी की सरकार इस दिशा में सक्रियता दिखा रही है लेकिन समय बहुत कम है और हर दिन बच्चियों और बच्चों की मौतें इस गंभीर समस्या का प्रमाण हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम जनता को भी टीकाकरण के प्रति जागरूक और सहयोगी बनने का आह्वान किया है। बीमारी के लक्षणों को तुरंत पहचानकर संबंधित अस्पताल या क्लीनिक में पहुंचने के लिए कहा गया है ताकि समय रहते उपचार संभव हो सके। विशेषज्ञ बताते हैं कि खसरे जैसी बीमारियां टीकाकरण के जरिए पूरी तरह रोकी जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

अंत में, बांग्लादेश की स्थिति एक चुनौतीपूर्ण दौर में है जिसमें सरकार, न्यायपालिका और जनता को मिलकर काम करना होगा ताकि अधिक बच्चों की जानें बच सकें और भविष्य में इस प्रकार की स्वास्थ्य आपदाओं को रोका जा सके।

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