दिल्ली ब्लास्ट केस में फंसाने की धमकी देकर बड़ा फ्रॉड, रिटायर्ड मैनेजर को 54 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा, 40.90 लाख ठगे

देश में डिजिटल अपराध के नये रूप सामने आ रहे हैं, जिनमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ का ट्रेंड लोगों को मानसिक और आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। हाल ही में मुंबई के भांडुप इलाके में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को दिल्ली बम धमाके और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर लगभग दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और 40.90 लाख रुपये की ठगी की।
पीड़ित राजेंद्र, जो महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के रिटायर्ड मैनेजर हैं, को 10 मार्च को एक सिग्नल ऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एटीएस अधिकारी ‘पीएसआई सिंह’ बताया और दावा किया कि राजेंद्र का नाम जनवरी में हुए दिल्ली बम धमाके और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संदिग्धों में शामिल है।
ठगों ने बताया कि उनका आधार और मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर कर्नाटक में बैंक खाता खोला गया है, जिसमें करोड़ों रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की धमकी दी गई। इस डर से राजेंद्र पर मानसिक दबाव डाला गया कि वे घर के एक कमरे में रहकर केवल वीडियो कॉल पर ही बात करें।
मनोवैज्ञानिक दबाव में आकर राजेंद्र ने 2.90 लाख रुपए पहले ही ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उन्हें अपने शेयर बाजार में लगे 29 लाख रुपये के निवेश को बेचने को मजबूर किया गया, जिसमें से करीब 28 लाख रुपए विभिन्न खातों में ट्रांसफर कराए गए। इसके अलावा, ‘बेल सिक्योरिटी’ नाम से ठगों ने 10 लाख रुपये की राशि भी वसूली, जिसे राजेंद्र की पत्नी ने लोन लेकर दिया। ठगों ने पूरी रकम शीघ्र वापस करने का भरोसा दिलाया परंतु पैसे मिलने के बाद उन्होंने संपर्क पूरी तरह काट दिया।
लगभग 54 दिनों तक इस डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रहने के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला, तब राजेंद्र को ठगी का अंदेशा हुआ। उन्होंने 3 मई को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई और 4 मई को मुंबई साइबर सेल में औपचारिक शिकायत दी।
मुंबई पुलिस ने बताया कि यह मामला डिजिटल अरेस्ट जैसी नई साइबर धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करता है, जहां अपराधी सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को डराते हैं और बड़ी रकम की ठगी करते हैं। पुलिस साइबर सेल फिलहाल संबंधित बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान एवं गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
इस प्रकार के साइबर अपराधों से बचने के लिए नागरिकों को सतर्क रहने, अपने व्यक्तिगत डेटा को संभालने और ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज करने वालों से तुरंत पुलिस को सूचित करने की सलाह दी जाती है। डिजिटल जमाना तेजी से बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षात्मक कदम भी जरुरी हो गए हैं ताकि लोगों को इस प्रकार के धोखाधड़ी से बचाया जा सके।
आईएएनएस के सहयोग से




