राजभर ने अखिलेश पर तंज कसा: 2027 में हार की तैयारी, ईवीएम बहाने पहले से कर रहे हैं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा सहयोगी नेता ओमप्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला किया है। राजभर ने कहा कि आजकल सपा वाले जमीनी संघर्ष से दूर हो गए हैं और केवल एसी कमरों में बैठे सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी से मिलीभगत कर अखिलेश चुनाव में हार की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए ईवीएम को बहाना बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है।
ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि ममता बनर्जी हफ्तों से इंतजार कर रही हैं कि अखिलेश यादव उनसे मिलेंगे, लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इतनी भयानक गर्मी में अखिलेश बहार निकलना भी पसंद नहीं करते, कहां रैलियों और रोड शो की बात करते हैं। उनका काम अब केवल दोपहर में उठकर एक ट्वीट करना रह गया है।
राजभर ने आगे बताया कि अखिलेश अब पश्चिम बंगाल भी जा रहे हैं ताकि ममता बनर्जी को ढांढस बंधाएं। वे बंगाल में रैलियां नहीं करेंगे बल्कि एसी की ठंडक में बैठकर समर्थन की गुजारिश करेंगे। राजभर ने कहा, “ममता जी, पिछले चुनाव की तरह आप मेरे समर्थन में यूपी जरूर आना।”
उन्होंने कहा कि बंगाल में ममता से वार्ता का मकसद यह संदेश देना है कि यूपी में सब कुछ ईवीएम की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह रणनीति इसलिए अपनाई जा रही है ताकि 2027 के चुनाव हार होने पर ईवीएम पर दोष डाला जा सके। राजभर ने शहजादों को चेतावनी दी कि जनता अब सिंहासन पर विराजमान है और खाली हो रहा सिंहासन जनता जल्द ही भर देगी।
राजभर ने कहा, “जहां भी सिंहासन खाली नहीं हो रहा, जनता ने नारा दे दिया है कि ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।'” उन्होंने अपने संदेश के अंत में जय महाराजा सुहेलदेव राजभर, जय ओबीसी समाज, जय भारत का जाप भी किया।
वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया है। इस चुनाव में ममता बनर्जी को अपनी परंपरागत भवानीपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा। ममता ने चुनाव आयोग और भाजपा पर आरोप लगाए कि कई सीटों पर वोटों की ‘लूट’ हुई है और चुनाव प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चुनाव हारी नहीं हैं और मुख्यमंत्री पद छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ओमप्रकाश राजभर की इस बयानबाजी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक पारा और भी गर्म हो गया है।




