10 साल सत्ता में रहने के बावजूद AGP के निरंतर पतन को छिपाते हैं हेडलाइन के आंकड़े

असम में भाजपा के जूनियर सहयोगी असम गण परिषद् (AGP) को पिछली बार की तरह चुनाव लड़ने के लिए समान संख्या में सीटें मिली हैं, लेकिन गहन विश्लेषण से पता चलता है कि पार्टी की जमीन धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार AGP के सामने चुनौती सिर्फ सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय मतदाताओं के बीच उसकी स्वीकार्यता में गिरावट भी है।
पूर्व में असम में भाजपा के साथ गठबंधन में रही AGP ने सत्ता में 10 साल बिताए हैं, लेकिन प्रदेश के कई इलाकों में उसकी पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है। चुनाव से पहले विभिन्न क्षेत्रीय रिपोर्टों ने संकेत दिए हैं कि पार्टी की परंपरागत समर्थक आधार अब कुछ इलाकों में भाजपा या अन्य दलों की ओर बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण माना जा रहा है पार्टी के स्थानीय मुद्दों को ठीक से न उठाना और युवा मतदाताओं के बीच संचार के अभाव को।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही AGP को समान संख्या में सीटें दी गई हैं, लेकिन सीटों पर जीत की संभावना इस बार कम हो सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां टकराव मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच होता है, AGP का समर्थन पिछली बार की तुलना में घटता दिख रहा है। पार्टी के नेताओं ने हालांकि भरोसा जताया है कि इस बार बेहतर रणनीति के साथ वे अपनी स्थिति मजबूत करेंगे, लेकिन आंकड़े इस विश्वास पर सवाल उठाते हैं।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने बताया, “AGP को यह समझना होगा कि केवल गठबंधन के नाम पर सीटों की संख्या मिलने से काम नहीं चलेगा। अगर वे स्थानीय मुद्दों पर जनता के विश्वास को वापस नहीं ला पाते, तो अगले चुनावों में उनकी राजनीतिक ताकत और भी कमजोर हो जाएगी।”
वहीं, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों ने भी यह दिखाया है कि कई परंपरागत AGP समर्थक युवाओं ने अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। इसके कारण पार्टी को अपने चुनाव अभियान में नए संचार माध्यमों और मुद्दों को सम्मिलित करना होगा।
निष्कर्षतः, असम गण परिषद् की इस चुनावी जंग में आगामी महीनों में उनकी डिजिटल और क्षेत्रीय रणनीतियों को लेकर व्यापक ध्यान दिया जाएगा। यदि पार्टी अपने कमजोर पहलुओं को नहीं सुधार पाई, तो यह भाजपा के लिए सहयोगी दल के रूप में चुनौतियों को जन्म दे सकती है। इस तरह गठबंधन और चुनावी समीकरण असम की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।




