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राजनीति

कांग्रेस और डीएमके संसद में अभी भी साथ काम कर सकते हैं, कहते हैं कार्ति पी. चिदंबरम

नई दिल्ली। लोकसभा के कांग्रेस सदस्य ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी राज्य स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धा के बावजूद भी सीपीआई(एम) और तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर काम करती रहती है। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भी सहयोग की संभावनाएं बनी रहती हैं और कांग्रेस इसे संसद में बरकरार रखना चाहती है।

कार्ति पी. चिदंबरम ने यह बात इसलिए कही क्योंकि देश की राजनीतिक पार्टियां अक्सर राज्य और केंद्र स्तर पर अलग-अलग राजनीति करती हैं। लेकिन उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर साझा मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन और सहयोग आवश्यक है, खासकर उन दलों के बीच जो लोकतंत्र की मजबूती चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और डीएमके के बीच भी ऐसे ही संवाद और सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है, जो आगे चलकर और मजबूत हो सकता है।

कांग्रेस ने पहले भी कई बार साबित किया है कि वह विपक्षी दलों के साथ रणनीतिक गठबंधन कर सकती है, ताकि सरकार के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी जा सके। कार्ति ने बताया कि संसद में कांग्रेस न केवल सीपीआई(एम) के साथ लगातार काम कर रही है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के साथ भी सहयोग में कोई कमी नहीं आई है, जो यह दर्शाता है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जरूरी नहीं कि सहयोग को बाधित करे।

इस संदर्भ में राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि राज्यों की राजनीति और केंद्र की राजनीति में कुछ मतभेद होने के बावजूद राष्ट्रीय हितों के लिए पार्टियां सहयोग करती हैं। वह भी तब जब आम मुद्दों पर सरकार के साथ मतभेद हों। इस प्रकार का सहयोग लोकतांत्रिक प्रणाली को बेहतर बनाता है और लोकसभा में विपक्ष की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाता है।

कार्ति पी. चिदंबरम के इस बयान को कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है, जिसमें वह विपक्षी दलों को एकजुट कर सरकार के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाना चाहती है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में हम विपक्ष के बीच इस तरह की पार्टनरशिप और सहयोग देख सकते हैं, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत हैं।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि भारतीय राजनीति में सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों अपने-अपने स्तर पर मौजूद हैं, लेकिन राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुटता दिखाने से ही देशहित की सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सकती है। कांग्रेस के इस स्पष्ट बयान से विपक्ष की राजनीति में नई ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिलेगा।

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