बैंगलोर में छात्रों से ‘जानिवर’ हटाने के लिए पीयू कॉलेज स्टाफ की निंदा करतीं संस्थाएँ

बैंगलोर, 27 अप्रैल 2024: बैंगलोर के एक पीयू कॉलेज में छात्रों को ‘जानिवर’ हटाने के लिए मजबूर करने के मामले ने सुर्खियां बटोर ली हैं। इस घटना पर कई संगठनों ने कड़ी निंदा की है और कॉलेज प्रशासन से तुरंत उचित कार्रवाई की मांग की है। पीयू कॉलेज की ओर से छात्रों से धार्मिक आभूषण हटाने को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों के कई पहलुओं पर बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार, बैंगलोर के इस प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में कुछ स्टाफ सदस्यों ने विद्यार्थियों से ‘जानिवर’ हटाने को कहा। ‘जानिवर’ जिसे यज्ञसूत्र के नाम से भी जाना जाता है, एक धार्मिक प्रतीक है जिसे हिंदू धर्म के कई अनुयायी पहनते हैं। छात्रों ने बताया कि यह आदेश अचानक और बिना किसी पूर्व सूचना के दिया गया, जिससे वे काफी असहज महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय छात्र संघ और कई धार्मिक तथा सामाजिक संगठन इस मामले में तुरंत सक्रिय हो गए। उनका कहना है कि छात्रों के धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए और किसी भी प्रकार की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना संविधान के खिलाफ है। कुछ संगठनों ने प्रशासन से कहा कि वे इसे एक संवेदनशील मुद्दे के रूप में लें और छात्रों के अधिकारों का सम्मान करें।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शैक्षणिक संस्थान जहां ज्ञान और कौशल विकसित करते हैं, वहां विद्यार्थियों की धार्मिक स्वतंत्रता का भी ख्याल रखना चाहिए। भारत में धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा माना गया मौलिक अधिकार है, और किसी भी शैक्षणिक संस्थान को इसका उल्लंघन नहीं करने दिया जाना चाहिए। यह घटना इसी बात की पुनः पुष्टि करती है कि स्कूल तथा कॉलेजों को अपने नियमों और परिचालन में सांस्कृतिक और धार्मिक बहुलता को ध्यान में रखना होगा।
कॉलेज के प्रबंधन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालाँकि, कुछ सूत्रों के अनुसार प्रशासन इस विवाद को सुलझाने के लिए वार्ता का प्रस्ताव लेकर छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकता है। छात्रों और अभिभावकों की उम्मीद है कि जल्द से जल्द एक संतुलित और न्यायसंगत निर्णय लिया जाएगा।
इस घटना ने शिक्षा संस्थानों में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर नयी बहस को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए स्पष्ट और समावेशी नीतियाँ बनाना आवश्यक है। इसके साथ ही, छात्रों को सुरक्षा और सम्मान का वायदा देने वाली एक सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।




