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नई दिल्ली। डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर विश्वभर में विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारत सरकार ने गेम सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म्स को भी नियामकीय दायरे में लाने का फैसला किया है। इस निर्णय से ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री की गतिविधियों पर निगरानी और नियंत्रण और कड़ा हो जाएगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गेमिंग सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षा और उपयोगकर्ता की गोपनीयता को मजबूत करने के लिए अधिसूचित किया है। यह कदम मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं को असामाजिक एवं हानिकारक कंटेंट से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नई नीति के तहत, इन प्लेटफॉर्म्स को अपनी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी, साथ ही वे उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा के लिए कड़े उपाय अपनाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में लगातार वृद्धि के साथ बच्चों तथा किशोरों पर इसके दुष्प्रभावों को रोकने के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि इस क्षेत्र को भी सख्त नियामकीय दायरे में लाया जाए। इससे न केवल डिजिटल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ऑनलाइन समय प्रबंधन, साइबरबुलिंग जैसी चुनौतियों का भी मुकाबला संभव होगा।
इसके अलावा, गेमिंग सॉफ्टवेयर संस्थाओं को भी पर्यवेक्षण के दायरे में लाकर उनकी वित्तीय तथा तकनीकी पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। मंत्रालय ने बताया कि वे संबंधित विभागों के साथ मिलकर इस नियमावली का कड़ाई से पालन कराएंगे ताकि अवैध या अनैतिक गेमिंग गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।
सरकार ने कहा है कि यह पहली बार है जब गेमिंग सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म्स की चुनिंदा सुरक्षा आवश्यकताओं को औपचारिक रूप से जिम्मेदार बनाया जा रहा है। इससे उपयोगकर्ताओं, खासकर युवाओं के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ डिजिटल माहौल बनाने में मदद मिलेगी।
साथ ही, विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि माता-पिता और अभिभावकों को भी बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखने के लिए जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए ताकि इस नए नियम का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।
इस तरह की नियामक पहल डिजिटल इंडिया और डिजिटल सुरक्षा दोनों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। उम्मीद है कि यह नया प्रावधान ऑनलाइन गेमिंग को सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने में सहायक साबित होगा।




