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शिक्षा

CPI(M) ने NTA को खत्म करने की मांग की, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग

नई दिल्ली: कॉम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए इसे खत्म करने की मांग की है। साथ ही पार्टी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने की भी अपील की है। पार्टी का आरोप है कि 2017 में स्थापित इस एजेंसी के कामकाज में कई गंभीर खामियां हैं, जिनकी वजह से परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

CPI(M) के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि NTA की स्थापना के बाद कम से कम चार बार परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। यह घटनाएं एजेंसी की कार्यप्रणाली की अनियमितताओं को उजागर करती हैं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की गहरी चिंता को दर्शाती हैं।

पार्टी ने आरोप लगाया कि NTA में तकनीकी, प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था संबंधी कई समस्याएं पाई जाती हैं, जो अब तक ठीक नहीं हो सकीं हैं। इन समस्याओं ने विद्यार्थियों के भरोसे को ठेस पहुंचाई है और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह खड़े किए हैं।

CPI(M) का कहना है कि परीक्षा नियामक संस्थान के रूप में NTA की स्थिति स्पष्ट नहीं है, क्योंकि लगातार लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। पार्टी ने केंद्र सरकार से इस एजेंसी की कार्यप्रणाली की पूरी समीक्षा कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

धर्मेंद्र प्रधान पर भी पार्टी ने निशाना साधा है और उन्हें आरोपित मामलों की जवाबदेही मानते हुए तत्काल इस्तीफा देने को कहा है। पार्टी का मानना है कि केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका में इस तरह की अनियमितताएं गंभीर हैं और इससे शिक्षा प्रणाली में विश्वास खत्म हो रहा है।

विश्लेषकों के मुताबिक, NTA पर लगाए गए ये आरोप शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए चुनौती बने हुए हैं। यह स्थिति सरकार और शिक्षा मंत्रालय के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यहां लाखों छात्र अपनी प्रतियोगी परीक्षाएं देते हैं और उनकी किस्मत इस प्रणाली पर निर्भर करती है।

इस मुद्दे पर विस्तृत जांच और सुधारात्मक कदम सरकार से जल्द अपेक्षित हैं ताकि शिक्षा क्षेत्र में न्यायसंगत और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली का मजबूत आधार बन सके।

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