NEET-सुपर स्पेशलिटी काउंसलिंग में देरी समाप्त करने की मांग – डॉक्टरों का आग्रह

नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कन्सलटेंसी टेस्ट (NEET) सुपर स्पेशलिटी काउंसलिंग में हो रही देरी से स्वास्थ्य क्षेत्र में असमंजस और तनाव बढ़ता जा रहा है। जनवरी में परिणाम घोषित होने के बाद भी अप्रैल 2026 में काउंसलिंग प्रक्रिया की शुरुआत नहीं हो पाई है, जिससे योग्य उम्मीदवारों के भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने इस विलंब को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, “परामर्श प्रक्रिया पूरी तरह से ठहराव की स्थिति में है,” जो न केवल छात्रों के लिए धोखा है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए भी नुकसानदायक है।
FAIMA ने सरकार और संबंधित विभागों से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि इस प्रक्रिया को शीघ्रता से शुरू किया जा सके। उनका मानना है कि इस देरी के कारण मेडिकल विशेषज्ञता के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है और देश के स्वरोजगार अवसरों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे महत्वपूर्ण काउंसलिंग आयोजन की देरी से न केवल छात्रों की मानसिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी बनी रहती है। इस कारण कई अस्पताल और क्लीनिक समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में असमर्थ हो जाते हैं।
सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई ठोस बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रशासनिक अड़चनों और व्यवधानों को दूर करने के लिए जल्द ही कदम उठाए जाएंगे। वहीं, उम्मीदवार निराशा में हैं और वे इस प्रक्रिया के जल्द आरंभ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इस पूरी स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों और चिकित्सकों का यह कहना है कि उच्च स्तरीय संवाद और साझा प्रयास से ही इस समस्या का समाधान संभव है। काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता को सुनिश्चित करना निहायत आवश्यक है ताकि भविष्य की प्रतिभाएं देश की चिकित्सा सेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
इस बीच, मेडिकल समुदाय, छात्र तथा अभिभावक सभी इस देरी के कारण उत्पन्न असुविधा से तंग आ चुके हैं और वे आशा करते हैं कि संबंधित अधिकारियों द्वारा शीघ्रता से इस गंभीर मसले पर ध्यान दिया जाएगा।




