राघव चड्ढा को राज्यसभा पिटीशन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

नई दिल्ली, 20 मई 2026: राज्यसभा सचिवालय ने आज सूचित किया कि राज्यसभा के सभापति ने डॉ. मेनका गुरुस्वामी को संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में नामित किया है। यह संयुक्त समिति कॉर्पोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2026 पर काम करेगी।
डॉ. मेनका गुरुस्वामी, जो वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं, को इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना गया है। उनका अनुभव और विशेषज्ञता, विशेषकर विधायी मामलों में, इस समिति के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी।
राज्यसभा सचिवालय के एक बयान में कहा गया, “राज्यसभा के सभापति ने 20 मई 2026 को डॉ. मेनका गुरुस्वामी, सदस्य, राज्यसभा, को संयुक्त समिति में सदस्य के रूप में नामित किया है, जो कॉर्पोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2026 का अध्ययन करेगी।”
कॉर्पोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2026 पर विचार करने वाले इस संयुक्त समिति का उद्देश्य व्यापार और उद्योग क्षेत्र के लिए कानूनी प्रावधानों को सरलीकृत और प्रभावी बनाना है, ताकि यह भारत के आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने में सहायक हो। इस समिति की नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है कि संसद इस बिल को गंभीरता से देख रही है और सभी पक्षों के विचारों को ध्यान में रखकर संशोधन करना चाहती है।
डॉ. मेनका गुरुस्वामी का चुनाव राज्यसभा में उनकी प्रभावशाली उपस्थिति और विधायी कार्यों में सक्रिय भागीदारी के कारण हुआ है। वे पहले भी कई महत्वपूर्ण समितियों का हिस्सा रह चुकी हैं और उनका मानना है कि उचित कानून निर्माण से ही देश में व्यवसायिक माहौल में सुधार लाया जा सकता है।
यह कदम सरकार की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है जो पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए विधायी प्रक्रियाओं को मजबूत करती है। राज्यसभा के सभापति ने इस नामांकन के माध्यम से यह संदेश दिया है कि संसद प्रत्येक विधेयक को ध्यानपूर्वक और स्वतंत्र तरीके से जांचने को तैयार है।
प्रमुख विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त समिति के सदस्यों का चयन इसBill के व्यापक और गहन विश्लेषण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल कॉर्पोरेट जगत को लाभ होगा, बल्कि आम नागरिक भी एक बेहतर कारोबारी और वित्तीय माहौल का अनुभव करेंगे।
संयुक्त समिति का अगला सत्र जल्द ही प्रारंभ होने की संभावना है, जहां विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा और संशोधन के सुझाव पेश किए जाएंगे। डॉ. मेनका गुरुस्वामी समेत समिति के सदस्य विधेयक के हर पहलू को परखने और सुझाव देने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
इस प्रकार, राज्यसभा में हुए इस नामांकन से यह स्पष्ट हुआ कि संसद भारत के आर्थिक और व्यवसायिक विकास के लिए मजबूत और प्रभावी कानून बनाना प्राथमिकता देती है।




