इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की आय से अधिक संपत्ति की जांच के आदेश दिए, CBI-ED को जांच के निर्देश

लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस शिकायत की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि सभी संबंधित एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जांच को पूरा करें।
कोर्ट का आदेश और संदर्भ
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की संयुक्त पीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने ज्ञात आय स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति अर्जित की है, जिससे गंभीर जांच की आवश्यकता है। कोर्ट ने CBI और ED को आठ सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। साथ ही, केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों को भी मामले पर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है। अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है।
एजेंसियों की प्रतिक्रिया
सुनवाई में CBI ने अदालत को सूचित किया कि याचिका की शिकायत मिल गई है और जांच प्रारंभ कर दी गई है। ED ने भी जांच शुरू करने की पुष्टि की है और शीघ्र ही कोर्ट को प्रगति रिपोर्ट देंगे। कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की जानकारी
एस. विग्नेश शिशिर, जो भाजपा कार्यकर्ता एवं व्यवसायी हैं, लंबे समय से राहुल गांधी के खिलाफ विभिन्न कानूनी चुनौतियां पेश कर रहे हैं। उन्होंने पहले भी राहुल गांधी पर विभिन्न आरोप लगाए हैं, जिनमें दोहरी नागरिकता का विवाद भी शामिल है। उनकी यह याचिका आय से अधिक संपत्ति के विषय को लेकर उच्च न्यायालय में पहुंची है।
मामले का कानूनी एवं राजनीतिक महत्व
राहुल गांधी के खिलाफ यह मामला विशेष इसलिए है क्योंकि यह सीधे उच्च न्यायालय और केंद्रीय जांच एजेंसियों की संज्ञान में आया है। इस याचिका की योग्यता पर अंतिम फैसला सभी पक्षों के जवाब और सबूतों के बाद किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि राहुल गांधी रायबरेली से सांसद हैं और लखनऊ हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार भी इसी क्षेत्र में आता है। अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई और एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं।




