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दशक भर के IISc अध्ययन में पाया गया: मानवीय गतिविधियाँ पूर्वी हिमालयी पक्षियों के लिए खतरा

बेंगलुरु, 27 अप्रैल 2024: भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) द्वारा किए गए एक दशक लंबे अध्ययन में यह बताया गया है कि मानवीय गतिविधियों के कारण पूर्वी हिमालय क्षेत्र के पक्षी संकट में हैं। यह अध्ययन, जो 2014 से 2024 तक चला, ने क्षेत्र में हो रहे पर्यावरणीय परिवर्तनों का प्रभाव पक्षी प्रजातियों पर विस्तार से जांचा है।

पूर्वी हिमालय, जो अत्यंत जैव विविधता संपन्न क्षेत्र माना जाता है, में अनेक दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी पाए जाते हैं। IISc के शोधकर्ताओं ने क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में पक्षी प्रजातियों की संख्या और व्यवहार में आ रहे बदलावों को दर्ज किया। उनका निष्कर्ष है कि वनों की कटाई, कृषि विस्तार, शहरीकरण और जल प्रबंधन में मानवीय हस्तक्षेपों के कारण पक्षियों के आवास तेजी से प्रभावित हो रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अनूपा मेहरा ने बताया, “पक्षियों के निवास में आए इस नुकसान से उनके प्रजनन और भोजन के विकल्प सीमित हो रहे हैं, जो उनकी जीवित रहने की संभावना को कम कर रहे हैं।” अध्ययन में यह भी सामने आया कि कुछ प्रजातियां बदलाव के अनुकूल हो रही हैं, लेकिन कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां जोखिम में हैं।

आईआईएससी के प्रमुख वैज्ञानिक प्रोफेसर रवि कुमार ने कहा, “हमारे शोध से यह स्पष्ट होता है कि पूर्वी हिमालयी पक्षियों के संरक्षण के लिए तात्कालिक और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है। हमें प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना होगा।”

इस अध्ययन ने पूर्वी हिमालय क्षेत्र के पक्षियों की विविधता और उनकी स्थिति पर एक महत्वपूर्ण दृष्टि प्रदान की है। शोधकर्ताओं ने सरकार और पर्यावरण संरक्षण संगठनों से आह्वान किया है कि वे स्थायी विकास और संरक्षण नीति में सुधार करें और उन गतिविधियों को नियंत्रित करें जो पक्षियों के आवास को धमकी देती हैं।

यह अध्ययन न केवल स्थानीय जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी आवश्यक दिशा प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुरंत उचित कदम नहीं उठाए गए तो पूर्वी हिमालयी पक्षी धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

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