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80,000 वर्षीय डीएनए ने साज्निया गुफा से केंद्रीय-पूर्वी यूरोप के सबसे पुराने नियांडरथल समूह का खुलासा किया

नई दिल्ली: हाल ही में वैज्ञानिकों ने साज्निया गुफा से प्राप्त 80,000 साल पुराने डीएनए का विश्लेषण किया है, जिससे केंद्रीय-पूर्वी यूरोप के सबसे पुराने नियांडरथल समूह की पहचान हुई है। यह खोज प्रागैतिहासिक मानव विकास और नियांडरथल सामाजिक संरचना के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

साज्निया गुफा, जो वर्तमान पोलैंड में स्थित है, ने आधुनिक मानव के पूर्वज नियांडरथल के अनूठे जीवाश्म प्रदान किए हैं। नए शोध के अनुसार, यहां पाए गए जीवाश्मों की डीएनए जीनोम विशेषताओं से यह स्पष्ट हुआ है कि यह समूह यूरोप के अन्य ज्ञात नियांडरथल समूहों से बहुत भिन्न था। इस विशेष समूह की उपस्थिति ने वैज्ञानिकों को मध्य और पूर्वी यूरोप में नियांडरथल आबादी के वितरण और प्रवास के पैटर्न को बेहतर समझने में मदद की है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि 80,000 साल पुराना यह डीएनए अत्यंत पुराना और दुर्लभ है, जो नियांडरथल के व्यवहार, उनके पर्यावरण के साथ तालमेल और उनका वंशानुगत इतिहास समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शोध दल ने इस खोज के माध्यम से यह भी पता लगाया है कि नियांडरथल समूह संभवत: विभिन्न इलाकों में काफी समय से बसते रहे और उनकी देखभाल एवं सामाजिक व्यवहार अत्यंत विकसित था।

यूरोप में नियांडरथल मानव की उपस्थिति पर यह नया डेटा इस प्राचीन जाति के वैश्विक पैटर्न पर भी रोशनी डालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खोजें न केवल मानव विकास के मॉडल को परिष्कृत करेंगी, बल्कि बहस को भी बढ़ावा देंगी कि किस प्रकार नियांडरथल और आधुनिक मानव के बीच संबंध और उनकी विलुप्ति हुई।

इस अध्ययन का नेतृत्व पोलैंड के एक प्रमुख विश्वविद्यालय और यूरोप के विभिन्न पुरातत्व संस्थानों के शोधकर्ताओं के एक समूह ने किया है। उनका मानना है कि आगे की खोजें नियांडरथल की आनुवंशिकी और उनके पर्यावरण के बीच संबंध को और स्पष्ट करेंगी। इससे मानव इतिहास की गुत्थी सुलझाने में एक नई दिशा मिलेगी।

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