महाराष्ट्र सरकार ने संभावित एल नीनो प्रभाव के मद्देनजर जल प्रबंधन को कसा है फंदा, फडणवीस ने दी प्रभावी रणनीति अपनाने की सलाह

महाराष्ट्र, 27 अप्रैल 2024: महाराष्ट्र सरकार ने संभावित एल नीनो की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के दक्ष और प्रभावी प्रबंधन के लिए कड़ा कदम उठाया है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार से प्रभावी रणनीति अपनाने की अपील की है।
जल और पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में बारिश के पैटर्न असामान्य रूप से प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण जल संसाधन घटने की संभावना जताई जा रही है। एल नीनो प्रभाव के चलते इस बार भी मानसून कमजोर पड़ने की आशंका है। ऐसे में सरकार ने जल संरक्षण और बेहतर उपयोग की रणनीतियां तैयार करने का फैसला किया है।
फडणवीस ने सलाह दी कि सरकार न केवल जल संचयन को बढ़ावा दे बल्कि किसानों और आम जनता को जल संरक्षण के प्रति जागरूक भी करे। उन्होंने कहा कि “इस चुनौतियों भरे समय में हमें संयमित और दीर्घकालिक योजना बनानी होगी ताकि किसानों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।”
विभिन्न जिलों में जल प्रबंधन के लिए विशेष कमेटियां गठित की गई हैं जो स्थानीय स्तर पर जल स्रोतों की स्थिति का आंकलन कर आवश्यक कदम उठाएंगी। इस दौरान बारिश जल संचयन, तालाब, बंधारण आदि के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जिलाधिकारी और पंचायत स्तर के अधिकारी भी ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण अभियानों को तेज कर रहे हैं। स्कूलों और सार्वजनिक जगहों पर जल संकट और बचत के विषय पर सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ने से कुल वर्षा कम होती है, जिसके चलते सिंचाई व पेयजल दोनों पर दबाव बढ़ जाता है। इसलिए समय रहते प्रभावी जल प्रबंधन नीतियां बनाना आवश्यक है।
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो सीतान पॉशकता के लिए अतिरिक्त आपातकालीन उपायों को अपनाया जाएगा। साथ ही, नागरिकों से अपील की गई है कि वे जल की बचत और संरक्षण में सक्रिय सहयोग करें।
महाराष्ट्र में जल संकट के समाधान के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में भी पानी की कमी जैसी समस्याएं घट सकें।
इस प्रकार, महाराष्ट्र सरकार ने एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए जल प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिससे न केवल मौजूदा जल संकट से निपटा जा सके, बल्कि आने वाले समय के लिए भी पानी की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।




