केंद्र ने जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने तथा जनसंख्या स्थिरीकरण उपायों की सिफारिश के लिए समिति गठित की

नई दिल्ली: भारत सरकार ने जनसंख्या में हो रहे परिवर्तनों का गहराई से अध्ययन करने के लिए गृह मंत्रालय की देखरेख में एक समिति गठित की है। इस समिति को सरकार ने जनसंख्या स्थिरीकरण से जुड़े उपाय सुझाने का काम सौंपा है। मंत्रालय ने समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
गृह मंत्रालय ने कहा कि देश में जनसांख्यिकीय बदलावों का प्रभाव सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से गहन होता जा रहा है। इन परिवर्तनों के सही आंकलन और रणनीतियों की आवश्यकता है, ताकि देश की समृद्धि और विकास को दीर्घकालिक आधार पर सुनिश्चित किया जा सके।
इस समिति में जनसांख्यिकी, सामाजिक-विज्ञान, चिकित्सा विशेषज्ञता तथा नीति निर्माण के क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति का उद्देश्य न केवल जनसंख्या नियंत्रण के उपायों पर सुझाव देना है, बल्कि सतत विकास के लिए ऐसी नीतियां विकसित करना भी है, जो जनसंख्या व्यवस्था को सामान्य और स्थिर बनाए रखें।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ‘‘हमारी सरकार जनसंख्या स्थिरीकरण को अत्यंत गंभीरता से लेती है। यह कदम उन चुनौतियों का सामना करने के लिए उठाया गया है जिनका सामना देश आज और भविष्य में कर सकता है। समिति की रिपोर्ट नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभाएगी।’’
वर्तमान में भारत की जनसंख्या लगभग 140 करोड़ के आसपास है और देश विश्व का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र है। जनसंख्या वृद्धि दर धीमी जरूर हुई है, परन्तु अभी भी कई क्षेत्रों में असंतुलन दिखाई देता है, जो कि सामाजिक और आर्थिक दबावों को जन्म देता है। ऐसे में मौजूदा जनसांख्यिकी रुझानों का विश्लेषण और उनके नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय जरूरी हैं।
इस पहल से अपेक्षा है कि देश में जनसंख्या स्थिरीकरण तथा इसके परिप्रेक्ष्य में स्थायी विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि समिति की रिपोर्ट में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण, महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने, परिवार नियोजन कार्यक्रमों को प्रभावशाली बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव मिल सकते हैं।
सरकार और विशेषज्ञ दोनों इस बात पर सहमत हैं कि जनसंख्या नीति में सुधार एवं स्थिरीकरण प्रयासों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाना आवश्यक है ताकि भारत अपनी सामाजिक-आर्थिक प्रगति को संजो सके।
समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी वर्षों में देश की जनसंख्या नीति में संभावित बदलाव और उपायों की रूपरेखा स्पष्ट हो सकेगी। तब तक सरकार इस दिशा में सक्रियता से काम करती रहेगी।




